केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की क्वालिटी ,सलीके,शाइस्ता अंदाज की कोशिशों से बीजेपी सरकार की नई उड़ान योजना की जामिया मिलिया इस्लामिया में आवासीय कोचिंग में पढ़कर श्रुति शर्मा ने यूपीएससी परीक्षा में टाप कर काटा तहलका,1,2,3,4,रैंक में लड़कियों का कब्जा,बना चर्चा

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तहलका टुडे टीम

दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का देश की तरक्की नवजवानों को नई राह दिखाने के लिए शुरू की गई नई उड़ान योजना मे क्वालिटी ,सलीके,शाइस्ता अंदाज की ऐसी कोचिंग की शुरूआत जामिया मिल्लिया इस्लामिया में शुरू करवाई की श्रुति वर्मा ने टॉप कर तहलका मचा दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ,केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी कामयाब छात्रों को मुबारकबाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

आज संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE 2021) का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है. जो उम्मीदवार फाइनल राउंड में शामिल हुए थे,लगभग 685 उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा 2021 में सफलता हासिल की है. इस बार श्रुति शर्मा ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर टॉपर बनी हैं. खास बात यह है कि टॉप 5 रैंक में 4 लड़कियां शामिल हैं. अंकिता अग्रवाल और गामिनी सिंगला ने दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया है. ऐश्वर्या वर्मा की रैंक 4 और उत्कर्ष द्विवेदी पांचवें नंबर पर हैं.यक्ष चौधरी छठे नंबर पर रहे. आठवीं रैंक इशिता राठी, नौवीं रैंक प्रीतम कुमार और दसवीं रैंक हरकीरत सिंह रंधावा को हासिल हुई है.

टॉपर श्रुति सेंट स्टीफंस कॉलेज और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पूर्व छात्र हैं. उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया आवासीय कोचिंग अकादमी में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की थी.

वही हज कमेटी ऑफ इंडिया में कोचिंग कर रहे 2 युवकों को भी यूपीएससी में कामयाबी मिली है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय की नई उड़ान योजना के तहत अल्पसंख्यक मेधावी छात्र जो कि यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC), स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन (SPSC) तथा स्टाफ सलेक्शन कमीशन (SSC) आदि के प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रथम चरण की परीक्षा को पास कर चुके हैं । उन छात्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं के दूसरे चरण की तैयारी में आर्थिक मद्द हेतु निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था करना है। दरअसल सरकार का मकसद अल्पसंख्यक मेधिवी छात्रों द्वारा आर्थिक मजबूरी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी न कर पाने की समस्या का निदान करना है, तथा सरकारी उच्च पदों पर अल्पसंख्यक अभ्यर्थियों के भागीदारी को बढ़ाना है।

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