यूपी में स्वास्थ विभाग की लापरवाही और मिलीभगत से मिलावट खोर एक्टिव, चंद टको में बिकने वाले अधिकारियों की वजह से प्रदेश में खुलेआम बिक रहा है सिथेटिक खोया, रंगीन कचरी-पापड़,सेहत बिगाड़ने के लिए होली में बड़े पैमाने पर खपाने की तैयारी जोर शोर से जारी

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तहलका टुडे टीम

लखनऊ::होली का त्योहार आते ही उत्तर प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थ व नकली खोया ,कचरी-पापड़ दुकानों में सजना और बिकना शुरू हो गया हैं.गुझिया में खोया की डिमांड और कचरी पापड़ का रंग बिरंगा रंग देखकर लोग इन्हें शौक से खरीद रहे हैं, लेकिन कहीं यह मिलावटी भरा खाना आपकी सेहत न खराब कर दे. वहीं, विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही और मिली भगत के कारण लोगों की सेहत को खतरा है. लखनऊ कानपुर,अयोध्या मेन सेंटर बन गया है।

वैसे तो त्योहार आते ही विभाग के अधिकारी दुकानों में छापा मारना शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार चुनाव के चलते ऐसा कुछ नहीं है. नकली कचरी-पापड़ के दुकानदार लोगों की सेहत खराब करने को दुकान सजाए बैठे हुए हैं. अगर इस बाबत पर अभी कोई गौर नहीं किया गया तो इसमें शहर वासियों की सेहत खराब हो सकती है. खाद्य औषधि विभाग अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं. अधिकारियों का कहना है कि हम लोगों का व्यापार बंद नहीं कर सकते हैं.

नकली आलू के पापड़ 50 से 150 रुपए किलो
एक दुकानदार ने बताया कि आलू का पापड़ सबसे महंगा बिक रहा है, जबकि आलू चिप्स 250 रुपये किलो बिक्री किया जा रहा है. बाजार में मैदा के पापड़ की बिक्री 120 रुपये किलो की जा रही है. सबसे सस्ते चावल के बने चिप्स, पापड़ और कचरी बिक रहे हैं. चावल से बने पापड़ 70 रुपये प्रति किलो, चिप्स और कचरी 60 रुपये किलो बिक्री की जा रही है. अरारोट के चिप्स 130 रुपये किलो और 40 रुपये की 250 ग्राम बिक्री किए जा रहे हैं. वहीं, नकली किस्म के आलू के पापड़ 50 से लेकर 150 रुपए तक मैं मिल जाते हैं. शहर में बिकने वाली शुद्ध कचरी पापड़ कार रेट लगभग 250 से लेकर 400 तक है. वहीं, नकली कचरी पापड़ 50 से 150 तक बताया जा रहा है.

एफडीए विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
बताते चलें कि पिछले साल होली पर खाद्य विभाग ने नकली कचरी पापड़ और होली के अन्य सामग्री में मिलावट करने वाले पर लगभग 50 प्रतिशत लोगों पर कार्रवाई की थी. जिसमें काफी मात्रा में लोगों की दुकान से सामग्री इकट्ठी हुई थी. विभाग के अधिकारियों ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी. लेकिन इस बार होली पर विभाग अपनी आंखें बंद करें बैठा है. इस बार होली पर विभाग के अधिकारियों ने 10 प्रतिशत लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है. ऐसे में माना जा रहा है कि खाद्य औषधि विभाग इस काम को अंजाम देने में नाकाम साबित हो रहा है.

संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य परिवार कल्याण के डॉक्टर बागीश वैश्य के मुताबिक,बाजार में बिकने वाले पापड़ और कचरी ज्यादातर मिलावटी ही होते हैं. ऐसी चीजें किसी की भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं. इनको खाने से दस्त, पेट में संक्रमण, त्वचा की एलर्जी और डायरिया होने की आशंका बहुत होती है.

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