हाय अफसोस फरिश्ता नुमा बाराबंकी की मोआजिज़ शख्सियत सैयद तहजीब असकरी साहब नही रहे,मुंबई में इंतकाल,बाराबंकी कल आएगा जनाजा

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पैकर-ए-इज्ज़-ओ-ख़ुलूस-ओ-सादगी
तू है तहज़ीब-ओ-तमद्दुन का निखार

तू ने यक-जिहती अता की क़ौम को
एकता का दान भारत को दिया

सर हुआ ऊँचा हमारा हर जगह
तू ने वो सम्मान भारत को दिया

अपनी जिंदगी के 72 साल पूरे करने वाले हर दिल अजीज समाजसेवी इंसानियत की खिदमत में दिन रात गुजारने वाले मोहतरम तहजीब असकरी साहब 13साल के पोते मोहम्मद असकरी की अचानक मौत के सदमे से अभी उभर भी नही पाए थे की गले में बढ़ती तकलीफ के चेकअप ने लखनऊ से मुंबई का सफर करा दिया,सबसे बड़े और देश के मशहूर डॉक्टर सुल्तान प्रधान को दिखाया गया है, आज जूमें को बायोपसी के बाद घर आए और चंद मिनट में इस दुनिया को छोड़कर चले गए,

आपको ये भी बता दे बाराबंकी के 52 गांव सैयदवाडा में से एक गांव जो तहसील हैदरगढ़ के सिद्धौर ब्लॉक के सरायमीर के नाम से मशहूर है में एक बड़े जमीदार खानदान के चश्मो चिराग अलहाज सैयद तहजीब असकरी करबलाई साहब बचपन से ही गरीबों की मदद करना इंसानियत की खिदमत करना और मजलुमो का खुलकर साथ देना शौक था,

बाराबंकी कलेक्ट्रेट कर्मचारी यूनियन के प्रेसिडेंट रहे,कई बार कर्मचारियों के हक की लड़ाई लड़ते हुए जेल भी गए, अजियते भी तमाम उठाई और अपनी मांगे मनवा कर लौटेते थे,

पूर्व कद्दावर मंत्री मोहसिना किदवई ,राम सेवक यादव,अनंत राम जायसवाल,बेनी प्रसाद वर्मा, इनकी खुबियो से खूब वाकिफ थे अक्सर इनसे खामोशी से मशविरा भी लेते थे,

जिलाधिकारी कार्यालय से रिटायर्ड होने के बाद बाराबंकी में कायम हुई फातिमा सोसाइटी के एक अहम रूक्न बनकर बेवा यतीम गरीब मिस्कीन की मदद,उनकी तालीम में रात दिन एक करने लगे बेहद खामोशी के साथ घर घर जाकर लोगो की मदद करना अपना फरीजा समझते थे,

देवा रोड स्थित असकरी हाल के करीब इन्होंने अपना आवास बनाकर पूरे जिले में खिदमते खल्क और आपसी एख्तेलाफात को खत्म कर भाई चारे एकता के साथ सेव वक्फ इंडिया मिशन कब्रिस्तान करबला वकफखोरों से बचाओ की मुहिम चला रखी थी,

बच्चो के स्कूल के साथ लड़कियों को शिक्षित करने के लिए स्कूल डिग्री कॉलेज और आशूर खाना, इबादत खाना खोलने के लिए फिक्रमंद रहते थे,

मोहर्रम में आजादरी में एक नया रुख दिया, जुलूस में हर धर्म के लोगो को साथ लेकर चलने के साथ साथ ब्लड डोनेशन कैंप,आंखो के चेकअप के साथ स्वस्थ शिविर,गरीब जरूरत मंदो में फ्री दवाओं और कंबल की तकसीम,सबील के आयोजनों का एहतमाम करते रहते थे,
जिले का सबसे बड़ा रुखसते अजा 8 रबी अव्वल हजरत इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम की शहादत के जुलूस में लोगो को एक जुट कर इस बड़े कार्यकम में मुख्य भूमिका में रहते थे,

हसद जलन रखने वाले बदतमीज दुश्मनों की गलतियों को नजरंदाज करना माफ करना और भूल जाना इनकी खासियत थी।

देश में एकता भाई चारे शांति के लिए हमेशा मुहिम चलाने वाले इस वक्त अचानक पोते की मौत के सदमे के बाद इस बीमारी की चपेट में होने के बाद भी उनकी अपनी कोशिशें लोगो की भलाई के लिए जारी रखनी थी,

नेक बेटे शरिब असकरी, मौलाना जवाद असकरी,काशिफ असकरी और बेटियां भी अपने वालिद के नक्शे कदम पर उनके हुक्म के मुताबिक इंसानियत की खिदमत में रात दिन एक किए रहते है।

हम सब मिलकर तहजीब असकरी साहब की रूह को सुकून के लिए आइए दुआ करे।

इनकी सोच और फिक्र हमेशा ये रहती थी।

या रब फ़लक से ऊँचा इस देश को उठा दे
मेरे चमन को सब से अच्छा चमन बना दे

इज्ज़त बड़ों की करना छोटों से प्यार करना
दुनिया की सारी अच्छी बातें हमें सिखा दें

मंज़िल नसीब करना गुमराही से बचाना
जो सीधे रास्ते हैं उन पर हमें चला दे

महफ़ूज़ रखना शाखें बुलबुल के आशियाँ की
इस गुल्सिताँ में या रब फूल अम्न के खिला दे

हर फूल हर कली की करता रहूँ हिफ़ाज़त
जन्नत से इस चमन का माली मुझे बना दे

बढ़ते हुए अँधेरे नफ़रत के ख़त्म कर के
हर दिल में एकता की इक शम्अ फिर जला दे

हर पेड़ इस चमन का फूले फले हमेशा
गहवारा शांति का या रब इसे बना दे

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