कम खर्च में अपने घर को सलीके से चलाने वाली महिलाये जेहाद का पाती है सवाब-बुराई,बदकलामी,झूठ मक्कारी से बचने के लिये अपने ज़मीर को रोकना भी है नफ़्स का जेहाद,1200 मकतबों के बोर्ड तंज़ीमुल मकातिब के सेक्रेट्री मौलाना सैयद सफ़ी हैदर साहब की तक़रीर से फ़सादियों में हड़कंप

बाराबंकी

दुश्मन के लिये दिल से दुआ करना भी है एक जेहाद

हमें उन गुनाहों से बचना चाहिये जो हमारी दुआओं को बार्गाहे इलाही तक पहुंचने नहीं देते

तहलका टुडे टीम

बाराबंकी। 1200 मकतबों के बोर्ड तंज़ीमुल मकातिब के सेक्रेट्री मौलाना सैयद सफ़ी हैदर साहब की तक़रीर से फ़सादियों में हड़कंप मच गया है उन्होंने कहा जो महिलाये कम खर्च में अपने घर को सलीके से चलाती है अपने शौहर को आजिज़ नही करती वो जेहाद का पाती है सवाब वही
बुराई समेत,बदकलामी,झूठ मक्कारी से बचने के लिये अपने ज़मीर को रोकना भी है जेहाद,

मौलाना गुलाम अस्करी हाल में कनीज़ मेहदी(शन्नो बेगम) बिन्ते सैयद हुसैन की याद में आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैयद सफी हैदर साहब ने आगे कहा
जो अपने को जहन्नम से बचाकर जन्नत की तरफ़ ले जाते हैं उनकी मामूली सी भी नेकी कामयाबी की तरफ़ ले जाती है । तक़वे के साथ मामूली सी भी दुआ काफ़ी होती है ।हमें उन गुनाहों से बचना चाहिये जो हमारी दुआओं को बार्गाहे इलाही तक पहुंचने नहीं देते ।

उन्होंने यह भी कहा कि हर वो काम करो जिससे जन्नत की नेमत और रज़ाये परवर दिगार हासिल हो,जो जहन्नम की तरफ़ ले जाये उनसे बचो जो वाजिब छोड़कर मुस्तहब अपनाते हैं तक़वे से खारिज हो जाते हैं अज्रो सवाब भी नहीं पाते हैं । जो फर्ज़ अदा करने के बाद मुस्तहब अदा करते हैं कई गुना सवाब पाते हैं । दुश्मन के लिये दिल से दुआ करना भी जेहाद है । जो अल्लाह के करीब होते हैं वो गुनाह से हमेशा दूर रह्ते हैं । अमल से दीन का गासिब खुद को ज़बान से दीन का पैरो कार बताये तो भी वो दीन का पैरोकार नहीं हो सकता ।

आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किए जिसे सुनकर सभी रोने लगे।

मजलिस से पहले मौलाना हिलाल ने पढ़ा- हर गम की दवा हज़रते शब्बीर का गम , और कोई गम किसी गम की दवा बन न सका ।

तालिब ज़ैदी ने पढ़ा – हम मदीना गये सामरा भी गये काज़मैनों नजफ और खुराशां गये ।पहुंचे जब करबला तो ये दिल ने कहा कुर्ब में आ गये कुर्ब में आ गये ।

अजमल किन्तूरी ने पढ़ा- यूं अबू तालिब ने की है मुस्तुफ़ा की परवरिश ,जैसे सूरज पर किसी ने बढ़ के साया कर दिया ।

हाजी सरवर अली कर्बलाई ने पढ़ा- परदा ओ अज़मत फ़ज़ीलत और हक़्क़े ज़िन्दगी , सिन्फे़ नाज़ुक ने बहोत कुछ तुमसे पाया है बतूल ।

चेहरा ए आमाल का हम जायज़ा लेते रहें , आइना किरदार का तूने वो रक्खा है बतूल ।

फ़राज़ मेहदी ज़ैदी ने पढ़ा –
औरतों को बेरिदा हर सू घुमाना है तो फिर , बेटियों के नाम क्यूँ रखते हो ज़हरा फातिमा ।

मजलिस का आगाज़ तिलावते कलामे इलाही से मौलाना हिलाल अब्बास ने किया ।

निज़ामत के फरायज़ अजमल किन्तूरी ने अंजाम दिये।

बानिये मजलिस सरवर अली रिज़वी ने सभी का शुक्रिया अदा किया और बताया कि इस सिलसिले की अगली मजलिस इसी अज़ाखाने में अगली जुमेरात यानी 22 जुलाई को शाम 7:45 पर होगी जिसे मौलाना मुराद रज़ा साहब खिताब फरमायेंगे।

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