जिंदगी के 6 दशक तक सियासत की हर करवट में बाराबंकी का नाम पूरी दुनिया में अपने हुस्नो अखलाक से रौशन करने वाली माँ मोहसिना किदवई अपने एक लाडले अशोक सिंह की अचानक मौत का पुरसा भाई अरविंद सिंह गोप और बेटे हर्षित को देने के लिए सिविल लाइंस आवास पहुंच गई।

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तहलका टुडे टीम/रिज़वान मुस्तफा

90साल की बुजुर्ग,पैरो में तकलीफ के बाद भी मोहतरमा मोहसिना किदवई ने अरविंद सिंह गोप को गले लगाकर अशोक भैय्या के चित्र पर गुल पोशी कर श्रद्धांजलि पेश कर ये पैगाम दिया कि अखलाक और किरदार ऐसी ताकत है जो सारी बंदिशों और तकलीफों को तोड़ कर अपने अजीजो के पास पहुंचने को मजबूर कर देती है,

रूहानी किरदार की ताकत का नजारा देख कर हर कोई आश्चर्य में था,


लेकिन हकीकत ये है की अरविंद सिंह गोप ने अपने अखलाक से ऐसा करिश्मा बाराबंकी की आवाम पर कर रक्खा है की इस नवजवान नेता की बुजुर्ग और महिला बच्चे नवजवान,ईमानदार,सदाचारी,जुझारू,इंकलाबी,लोगो के दिलो में एक मुकाम है,
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आए, सांसद बृज भूषण आए,डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ,मंत्री जितिन प्रसाद,पूर्व सांसद पीएल पुनिया,प्रियंका सिंह रावत,समेत कई मौजूदा और पूर्व मंत्री है,कई नेता,कई पत्रकार,कई अधिकारी आए लेकिन उन सब में मां मोहसिना किदवई का जायिफी के बाद पुरसा देने आना गम के आंसुओ को अहमियत देकर गम जदा दिलो का मरहम बन गया,


3 दशक में शायद ही कोई इस बुलंदी पर पहुंचा हो जिसके घर मां ने जाकर खिराजे अकीदत शायद पेश की हो।
अशोक भाई आप अमर हो गए,वही गोप भाई की बाराबंकी की जमीन पर सियासी तपस्या का असर और इज्जत का नया अवतार लोगो ने देख लिया,

कुछ लोगो के दिलो मे बैचेनी थी,लेकिन गोप के अजीजो में इस बुलंद मर्तबे से सुकून चेहरे पर नुमाया थे।

कौन है मां मोहसिना किदवई?शायद ही आप लोगो को पता हो

देश आजाद होने के बाद सबसे ज्यादा सियासत में सक्रिय यही खातून रही।बाराबंकी की तरक्की में अहम रोल रहा है।

मां मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को मुल्ला कुतुब-उद-दीन अहमद और जेहरा खातून के घर हुआ था, जो मुख्य रूप से बाराबंकी जिले के एक छोटे से गाँव अहमदपुर से थे । उन्होंने महिला कॉलेज , अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय , अलीगढ़ से अपनी तालीम हासिल किया था,17 दिसंबर 1953 बेहद नेक और शरीफ खलील आर. किदवई बड़ा गांव मसौली से थे के साथ शादी हुई थी, इनके तीन बेटियां है,
वह कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य रह चुकी है , जो भारतीय कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
उन्होंने अपनी जिंदगी के दौरान देश के लिए जो ज़िम्मेदारियां संभाली वो काबिले गौर है।

सबसे पहले वो सदस्य उत्तर प्रदेश विधान परिषद 1960 में बनी,
1973 में राज्य मंत्री, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, उत्तर प्रदेश सरकार,1974 में सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान सभा और फिर
कैबिनेट मंत्री हरिजन और समाज कल्याण, उत्तर प्रदेश सरकार
लघु उद्योग मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री रही

छठी लोकसभा की सदस्य बनी आजमगढ़ से उपचुनाव जीता 1978,सातवीं लोकसभा , मेरठ से 1980 1984
केंद्र में राज्य मंत्री श्रम और पुनर्वास बनी,
फिर राज्य मंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बनी,
आठवीं लोकसभा की सदस्य 1984 1989तक रही,
केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) 2 अगस्त 1984 31 अक्टूबर 1984 तक रही,
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री ग्रामीण विकास 4 नवंबर 1984 से 31 दिसंबर 1984 तक रही,फिर
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण 31 दिसंबर 1984 दिसंबर 24 जून 1986 तक रही,
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री परिवहन 24 जून 1986 से 22 अक्टूबर 1986 तक रही,
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के शहरी विकास 22 अक्टूबर 1986 से 2 दिसंबर 1989 तक रही,
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री पर्यटन ( अतिरिक्त प्रभार ) 14 फरवरी 1988 25जून 1989 तक रहा,
राज्यसभा के लिए चुनी गए जून 2004 में वही
सदस्य, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का न्यायालय जुलाई 2004 –
सदस्य, कृषि संबंधी समिति अगस्त 2004 –
सदस्य, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अंजुमन (कोर्ट) नवंबर 2004
सदस्य, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के लिए सलाहकार समिति अक्टूबर 2004
सदस्य, जनसंख्या और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संसदीय मंच मई २००६
सदस्य, खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण समिति कमेटी जुलाई 2006 -सांसद के राज्यसभा के लिए छत्तीसगढ़
30 जून 2004 – 29 जून 2016
वही 4साल तक हज कमेटी ऑफ इंडिया की चेयरमैन रही,

इनका सिविल लाइंस, बाराबंकी स्थाई निवासआज भी है।
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