शहीद महात्मा गांधी की 73वी पुण्य तिथि पर उनकी आत्मा की शांति के लिये ना पढ़ी गयी गीता,रामायण,बाइबिल और क़ुरआन हत्यारे नाथूराम गोडसे पर लानत करने की भी हिम्मत ना जुटा पाये 40 लाख आबादी वाले बाराबंकी में गांधी विचारधारा के चिंतक

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गाँधी भवन में प्रतिमा को मिली माला,सर्वधर्म प्रार्थनासभा के नाम पर रखा गया मौन,कुछ नेक लोगो को बुला कर उनकी शख्सियत पर विचार प्रकट कर किया गया याद,

पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप, खुदाई ख़िदमत गार के हफ़ीज़ किदवई,रिज़वान रज़ा, पंडित राजनाथ शर्मा,सेव वक़्फ़ इंडिया के उमेर किदवई, सरदार राजा सिंह एडवोकेट ने बापू  पर रक्खे अपने इंक़लाबी विचार

फिज़ाओ और मीडिया ने जन जन तक पहुचाने का किया काम

तहलका टुडे टीम

बाराबंकी। 40 लाख आबादी के बाराबंकी ज़िले के पंडित राजनाथ शर्मा  एक अकेली शख्सियत है जो अकेले गांधी दर्शन और उनकी विचारधारा की अपने दम पर ज़िंदा किये है,इनके ऊपर गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की ज़हनियत के लोगो के हमले पर हमले होने के बाद ये अकेला ऐसा संत है जो गांधी की विचारधारा को ज़िंदा करने में अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहा है,ज़िले में आज गांधी जी के नाम पर धंधे में लगा गांधी आश्रम और कई संस्थाओ स्कूलों ने शहीद महात्मा गांधी की 73 वी पुण्य तिथि पर उनकी आत्मा की शांति के लिये ना गीता ,ना रामायण,ना बाइबिल और ना क़ुरआन का पाठ किया,ना किसी ने मरीज़ों को फल बांटे और ना ही किसी ने रक्तदान कर अपनी अक़ीदत का इज़हार किया
और यही नही हत्यारे नाथूराम गोडसे पर लानत करने की भी हिम्मत ना जुटा पाये 40 लाख आबादी वाले बाराबंकी में गांधी विचारधारा के चिंतकगाँधी भवन  प्रतिमा समेत कई जगह गांधी जी के चित्रो को मिली माला,सर्वधर्म प्रार्थनासभा के नाम पर रखा गया मौन,कुछ नेक लोगो को बुला कर उनकी शख्सियत पर विचार प्रकट कर याद करने की औपचारिकता में निपट गयी 30 जनवरी,हा सोशल मीडिया ने हस्बे दस्तूर फिज़ाओ और मीडिया ने जन जन तक पहुचाने का किया आज भी काम

गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा गांधी भवन में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा एवं व्याख्यानमाला में खुदाई खिदमतगार संगठन के प्रान्तीय संयोजक हफीज़ किदवई ने व्यक्त करते हुए कहा महात्मा गांधी के चिन्तन का क्षेत्र बहुत व्यापक एवं बहुआयामी है। गांधी जी मात्र विचारक, राजनेता तथा समाज सुधारक नहीं थे बल्कि राजनीति, चिंतन एवं दर्शन को नया मोड़ देने वाले सक्रिय राजनीतिज्ञ, सन्त एवं विचारशील चिन्तक थे। वे भारतीयता के सांचे में ढ़ले सत्य, अहिंसा, विश्व शान्ति, प्रेम की प्रतिमूर्ति एवं सन्त होने के साथ-साथ एक बहुत बड़े रणनीतिकार भी थे।किदवई ने आगे कहा कि महात्मा गांधी और बादशाह खान का धर्म अलग-अलग था लेकिन उनकी विचारधारा धर्मनिपेक्षता थी। गांधी एक ऐसी विचारधारा है जिसमें भगत सिंह, नेहरू, लोहिया, बादशाह खान और जिन्ना जैसी सारी धाराएं जुड़ी हुई है।इस मौके पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पूर्व मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप, वरिष्ठ पत्रकार अनिल त्रिपाठी, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जगत बहादुर सिंह, रिज़वान रज़ा, हफीज़ किदवई ने माल्र्यापण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं प्रातः 11 बजे उपस्थित जनों ने मौन धारण कर महात्मा गांधी की आत्म शान्ति की प्रार्थना की।

पूर्व मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप ने कहा कि गांधीजी क्रियाशील एवं व्यवहारिक दार्शनिक थे जो सिद्धान्त एवं व्यवहार के एकीकरण पर बल देते थे। आजीवन अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने वाले बापू ने संपूर्ण मानव जाति को न सिर्फ मानवता का पाठ पढ़ाया बल्कि जिंदगी जीने का सही तरीका भी सिखाया।

समाजसेवी रिज़वान रज़ा ने कहा कि गांधी जी के लिए परोपकार से बढ़कर कोई सेवा नहीं थी और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं था। गांधी जी भले ही आज हमारे बीच जीवित न हों, लेकिन अपने विचारों के जरिए वो हमेशा जीवित रहेंगे।समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि गांधी जी ने पूरी दुनिया को दिखाया कि निर्भीकता से सत्य और अहिंसा के मार्ग पर डटे रहकर किस तरह बड़ा लक्ष्य हासिल किया जाता है। बापू ने भारतीय समाज की बुनियाद को समझा और अंतिम व्यक्ति तक चिंता की।

इस मौके पर प्रमुख रूप जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जगत बहादुर सिंह, हाजी मो. उमेर किदवई, वरिष्ठ पत्रकार अनिल त्रिपाठी, सतीश प्रधान, पवन यादव, अनवर महबूब किदवई, सरदार राजा सिंह, हुमायूं नईम खान, स्टेशन अधीक्षक विनय कुमार शुक्ला, पाटेश्वरी प्रसाद, अतीकुर्ररहमान, जीमल-उर-रहमान, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, आसिफ हुसैन, रंजय शर्मा, सत्यवान वर्मा, हशमत अली, अशोक जायसवाल, नीरज दूबे, अभषेक तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे।

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