गोरखपुर और फूलपुर की हार से सबसे अधिक खुश कौन है? बीजेपी।

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इंडिया टीवी के एडीटर अभिषेक उपाध्याय की फेस बुक वाल से
जी हां। बीजेपी के जिस भी एमपी से बात कर रहा हूं, गदगद नजर आ रहा है।
लड्डू बंट रहे हैं। भीतर ही भीतर। वो भी देशी घी से बने हुए। शुद्ध नुकती के।
योगी आदित्यनाथ की जुमलेबाज़ी पर ये पहला तमाचा था। मारा सपा-बसपा ने। पर गदगद बीजेपी वाले हैं। ऑफ रिकार्ड बहुत कुछ बता रहे हैं।
कैसे योगी के राज में कार्यकर्ताओं की दुर्गति हो गई है।
खुद पांच बार एमपी रह चुके योगी का पार्टी के ही दूसरे सांसदों से मिलने का अंदाज़ बदल गया है। लगता है जैसे कोई चक्रवर्ती सम्राट दरबारियों से मिल रहा हो।
योगी के गोरखनाथ मठ के पुराने सिपहसलार जो आज की तारीख में उनके ओएसडी और पीए बनकर साथ लटक लिए हैं, किस तरह से “डेमी गॉड” में तब्दील हो चुके हैं। ये पीए और ओएसडी सत्ता के समानांतर केंद्र हो चुके हैं। आम आदमी का इनसे मिलना दुर्लभ है और खास लोगों का इन्हें साधकर हर “खास” काम “आम” होता जा रहा है।
किस तरह योगी एक समारोह से दूसरे समारोह धकाधक भाषण रेले चले जा रहे हैं। योगी के भाषणों की हवाबाजी अब डोनाल्ड ट्रंप को भी मात दे चुकी है। मनचलों की छेड़खानी से बचाने वाले योगी के कथित एंटी रोमियो स्क्वाड शायद कैलीफोर्निया की सड़कों पर ड्यूटी दे रहे हैं।
यूपी में उनकी छाया भी नही दीखती।
महज 40 दिनों में यूपी की सड़कों के सारे गड्ढे भर देने के दावे खुद को ही नही संभाल पाए हैं और गोरखपुर रेलवे स्टेशन के ठीक बगल वाले गड्ढे में धंस गए हैं। कोई ऐसी क्रेन नही मिल रही जो उन्हें वहां से निकाल सके।
महादेव की नगरी काशी की शक्ल बदल देेने वाले योगी के दावे की ही शक्ल तिरछी हो चुकी है।
महादेव से धोखा!!! नही चलता।
फिर वो चाहे योगी हो या गृहस्थ! योगी के अपने किए हुए “खांटी हिंदूवादी टाइप” के वादे भी सिर्फ मूर्ख बनाने की फैक्ट्री साबित हुए हैं।
चुनाव के दौरान चीख चीखकर कैराना से हिंदुओं के पलायन की सीबीआई जांच कराने की गर्जना
सीएम बनते ही लखनऊ के चिड़ियाघर का दुर्लभ प्रजाति वाला जीव बन गई। उसे अब कोई छू भी नही सकता।
यूपी के सारे अवैध बूचड़खानो का जुमलों की लफ़्फ़ाज़ी के हाथों क़त्ल हो गया है।
दरअसल दिक्कत यही है कि “भगवा” या “हरा” चोला सिर्फ भाषण देता है, विकास नही। नही तो पांच बार की सांसदी और अब यूपी की सीएम शिप में योगी ने गोरखपुर की तस्वीर बदल दी होती और रामपुर को आज़म ने ख्वाबों की जन्नत में तब्दील कर दिया होता।
ये हिंदू और मुसलमान की बातें क्या हैं? बिना कोई काम किए चुनाव जीत लेने का फॉर्मूला ही तो! ये फॉर्मूला है तो बड़ा सुपरहिट पर एक बड़ी दिक्कत भी है। ये चलता तो बड़े धड़ाके से है पर इसकी उम्र लम्बी नही होती।
योगी जी के गोरखपुर और मौर्या साहब के फूलपुर ने आज इस फॉर्मूले का “Age certificate” जारी कर दिया। अब बची उम्र की गिनती करते रहिए।
जय हो!

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