बाराबंकी में जोकं से होगा अब इलाज,यूनानी स्कॉलर्स एसोसिएशन ने लीच थिरेपी के माहिर डॉक्टर अब्बास जैदी के लेक्चर के साथ शुरू की कार्य शाला,कई लोगो का हुआ इलाज

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तहलका टुडे टीम/रिज़वान मुस्तफा

बाराबंकी की सरजमी हर फील्ड में अपने यहां हीरा पैदा करने में महारथ हासिल करती है,अब जोक से इलाज का मामला सामने आया है,यूनानी स्कॉलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर ए एच उस्मानी और सेक्रेट्री डॉ सलमान यूसुफ की तरफ से लीच थिरेपी पर कार्यशाला जीपैलेस,नबीगजं मे आयोजित की गई जिसमे लीच थिरेपी के माहिर डॉक्टर अब्बास जैदी असिस्टेंट प्रोफेसर गवर्नमेंट यूनानी मेडिकल कॉलेज,भोपाल मध्य प्रदेश ने जोक चिकित्सा पर विशेष रूप से जानकारी देकर लोगो को हैरत में डाल दिया।

कौन है डॉक्टर अब्बास

बाराबंकी के हैदरगढ़ तहसील के ग्राम जरगावा में पूरी जिंदगी लोगो की भलाई और इलाज के लिए लगाने वाले डॉक्टर कौसर अब्बास साहब के बेटे डॉक्टर अब्बास जैदी ने युनानी डॉक्टर बनने के बाद जोक चिकित्सा पर महारथ हासिल कर ली उन्हें मलेशिया मे साइंटिफिक कान्फ्रेंस, 2011 मे बेस्ट पेपर एवार्ड मिला था,2017 मे आयुष मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा यगं साइंटिस्ट एवार्ड मिल चुका है,इनका ननिहाल का ऊंचाहार मुस्तफाबाद रायबरेली के आला घराने से ताल्लुक है,जहा इनके रिश्ते के नाना मौलाना अली मिया नकवी साहब अपने ज़माना के बड़े हकीमों में से थे।आज भी उनके रूहानियत लिए नुस्खे इंसानियत की बका के लिए काम आते है।

डॉक्टर अब्बास से खास बात चीत में बताते है जोंक या लीच के बारे में आमतौर पर लोगों को इतना ही पता है कि वो शरीर पर चिपक जाएं तो सारा खून चूस जाते हैं लेकिन इस बात का ज्ञान कम ही लोगों को होगा कि जोंक कई तरह के उपचार में फायदेमंद होते है। लीच थेरेपी से रोगों का इलाज प्राचीन काल से होता आया है। इससे कई ऐसे रोगों का उपचार भी संभव है जिसके इलाज़ में बहुत अधिक पीड़ा होती है या पैसा लगता है।

लीच थेरेपी यानि जोंक चिकित्‍सा को प्राचीन काल से ही इस्‍तेमाल किया जाता है। उन्‍नीसवीं सदी की शुरूआत में यह थेरेपी उच्‍चतम लोकप्रियता पर पहुँच गई थी। लेकिन बींसवी सदी में लोगों के बीच इसका क्रेज नहीं रहा।

आधुनिक विज्ञान ने इसकी ओर ध्‍यान नहीं दिया और तर्क के आधार पर चिकित्‍सा करनी शुरू की दी।लेकिन हाल ही में कुछ शोधकर्ताओं ने पाया यह चिकित्‍सा पद्धति काफी स्‍वास्‍थ्‍यकारी है।

डॉक्टर अब्बास ने तफसील से लीच थेरेपी के रोचक तथ्य बताते हुए कहा यह बहुत ही आसान लेकिन प्रभावी थेरेपी है। इसमें जोंक को शरीर पर रख दिया जाता है। जोंक खून चूसना शुरू कर देती है और धीरे-धीरे सारा दूषित खून पी जाती है। इस उपचार में 45 मिनट तक का समय लग सकता है। यह तरीका दाद, कील-मुहांसे, खुजली, गंजापन, डायबिटीज आदि बीमारियों में बहुत ही राहत भरा है। इस थेरेपी के माध्यम से हमारे शरीर का गंदा खून निकल जाता है और हमारे शरीर में ऑक्सीजन वाले खून का संचार होता है।

डॉक्टर अब्बास आगे बताते हैं भारत में प्राचीन समय से ही जोंक थेरेपी से इलाज किया जाता रहा है। खून से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए उस जगह को जोंक से चुसवाया जाता है जिसे रक्तमोक्षण की विधि कहा जाता है। रक्तमोक्षण का अर्थ होता है रक्त को शरीर से मुक्त (बाहर) करना अर्थात जिस विधि के द्वारा शरीर से अशुद्ध रक्त को बहार निकाला जाता है वह क्रिया रक्तमोक्षण कहलाती है।

गंजे लोगो के खुशखबरी, जोंक दूर करेंगी गंजापन

डॉक्टर अब्बास बताते है गंजेपन से राहत द‍िलाए जोंक थेरेपी,जोंक रक्तसंचार बेहतर करने के लिए भी जाना जाता है। यही कारण है कि जोंक थैरेपी को सिर पर जहां बाल कम है, जैसे स्थान पर लगाया जाए तो वहां बाल आने की उम्मीद बढ़ जाती है। दरअसल जोंक थैरेपी से शरीर में पौष्टिकता बढ़ती जो बालों के लिए आवश्यक है। यही नहीं यह बालों को जड़ों से मजबूत करते हैं जिससे बालों को उगने में आसानी होती है। जो लोग डैंड्रफ या फंगल संक्रमण के कारण गंजेपन से जूझ रहे हैं, उनके लिए जोंक थैरेपी एक रामबाण इलाज है। जोंक का लार फंगल संक्रमण को खत्म करने में मदद करता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए है लाभदायक:-

डॉक्टर अब्बास ने बताया जोंक के लार में पाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण तत्व है हिरुडिन। इस वजह से इसे हिरुड‍िन थैरेपी भी कहा जाता है। यह तत्व रक्त में थक्के जमने नहीं देता। जबकि डायबिटीज के मरीजों का रक्त गाढ़ा होता है जिससे रक्त में थक्के जमने की आशंका बढ़ जाती है। अतः हिरुडिन उनके लिए बेहद जरूरी तत्व है। यही नहीं हिरुडिन में रक्त को फीका करने की क्षमता भी होती है मतलब साफ है कि इसके जरिये रक्त के थक्के जमने की आशंका में गिरावट आती है जिससे शरीर में रक्त प्रवाह सहजता से हो पाता है। साथ ही हृदय पर इसका कम प्रभाव पड़ता है।

डॉक्टर अब्बास ये भी बताते है इस विधि में सावधानी बरतना है आवश्यक लीच थेरेपी को लेने से पहले किसी डॉक्टर की सालाह लेना जरूरी है। कई लोगों को जोंक की लार से एलर्जी होने की शिकायत होती है। वहीं, जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है, उन लोगों को थेरेपी लेने से बचना चाहिए। इसी तरह अगर बीमारियों के उपचार के लिए पहले से आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं या किसी दवा का कोर्स चला रहे हैं तो एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  इस कार्यशाला मे लखनऊ,बाराबंकी,फैजाबाद, रायबरेली के बहुत से यूनानी डॉक्टरो ने हिस्सा  लिया और बहुत कुछ सीखा साथ ही  मरीजो का इलाज  भी किया गया जिसका डेमो भी दिखाया गया,

इस मौके पर डॉक्टर मुबशशिर,लखनऊ के डी ओ डॉक्टर सिराज अंसारी ,डॉक्टर आमिर जमाल,डॉक्टर एम एस सिद्दीकी,डॉक्टर तनवीर सुल्ताना,डॉक्टर नफीस,डॉक्टर शमीम खान,डॉक्टर अकमल,डॉक्टर नूर,डॉक्टर जियाउरहमान, डॉक्टर हसनैन,डॉक्टर आसिफ, डॉक्टर सरकार और बहुत से यूनानी डॉक्टरो ने शिरकत की।

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