वंदेमातरम भारत माता की जय और ईरान की पवित्र भूमि की जय कहकर ईरान भारत की दोस्ती की नई इतिहास की रचना करेंगे पतंजलि के रूहे रवा आचार्य बालकृष्ण,ईरान के आजादी टावर पर किया मौलाना कलबे रुशैद रिजवी के साथ ऐलान रुद्राक्ष की माला पहनाकर ईरानियों का दिल जीता

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सुनिए आचार्य की जुबानी उनकी पूरी यात्रा की कहानी

तहलका टुडे टीम

भारत को दुनिया में एक मुकाम देने के लिए पतंजलि की यात्रा में आचार्य बालकृष्ण का कार्य करने का जज्बा, पुरुषार्थ की भावना और परमपिता की कृपा हो तो रास्ते भी खुद-ब-खुद बनते जाते हैं। ईरान के मात्र तीन दिवसीय प्रवास में जितने आयाम और क्षेत्रों में काम करने का, देश के गौरव को बढ़ाने का, सांस्कृतिक उदात्तता को स्थापित करके दोनो देशों के बंधुत्व को बनाने का जो मौका मिला, वह अभूतपूर्व एवं अकल्पनीय है।

उसी के तहत ईरान सरकार के श्री अली रज़ा पैयमान पाक मंत्री, Ministry of Industry, Mine & Trade and President, Trade Promotion Organization of Iran और उनके साथ Mr. Mohammad Ali Nikbakht, Deputy Minister, Rural Cooperatives of Iran के साथ में एक MOU किया गया एवं दीर्घकालिक योजनाओं का सूत्रपात किया।

आचार्य बालकृष्ण अपने फेस बुक पर लिखते है हमें यकीन है कि यह न केवल देश के लिए अपितु भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

आगे लिखते है ईरान का सबसे बड़ा और 125 वर्ष पुराना विश्वविद्यालय तेहरान यूनिवर्सिटी जो कि कृषि, जड़ी बूटी और प्राकृतिक संसाधनों पर कार्य करता है, आज यहां के वाइस चांसलर और फैकल्टी मेंबर से मीटिंग हुई। यहां के प्रोफेसर और वैज्ञानिकों में पतंजलि के जड़ी बूटी अनुसंधान के कार्यों को लेकर जो हमें उत्साह दिखा वह हमें गौरव प्रदान करता है। उसके साथ साथ यह भी एहसास कराता है कि परम पुरुषार्थ और निष्काम भाव से किया हुआ कार्य पूरे विश्व में गूंजता है। यहां पर वैश्विक स्तर के जड़ी बूटी अनुसंधान और स्टूडेंट एंड फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम पर ज्वाइंट कॉलेबोरेशन को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने फरवरी में पतंजलि में होने वाले अंतरराष्ट्रीय महासमेलन में आने के लिए भी उत्सुकता प्रकट की।

तेहरान के 125 वर्ष पुराने कृषि विश्वविद्यालय का भ्रमण व अवलोकन किया,

ईरान के सबसे बड़े बैंक पसारगद के मुख्यालय मे विशेष वार्ता हुई। जिसमे पतंजलि की सहयोगी संस्था भरुवा सॉल्यूशन के विभिन्न फिन टेक उत्पाद, डिजिटल एग्रीकल्चर और पीओएस मशीन पर परस्पर सहयोग की बात हुई। सभी ने एकमत होकर इस कार्य पर तीव्र गति से पतंजलि और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय कमेटी के गठन का अनुमोदन किया।

इस मीटिंग में बैंक के प्रेसिडेंट एम घसेमी को भारत से लाया रुद्राक्ष भेंट भी किया जिसे उन्होंने न सिर्फ सहर्ष धारण किया अपितु उसके औषधीय गुणों को भी उत्सुकतापूर्ण ढंग से जाना। निश्चित रूप से यह दो सांस्कृतिक विरासतों का अतुल्य समन्वय है।

वही किसानों से संबंधित ईरान की राष्ट्रीय स्तर की संस्था जो कि लगभग 8000 संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करती है जिससे लगभग 65 लाख किसान जुड़े हैं। उस संस्था के माध्यम से यह तय किया गया कि ईरान मानकों के अनुसार उत्तम क्वालिटी का कृषि आधारित उत्पाद ड्राई फ्रूट्स, केसर, फ्रूट्स पल्प से लेकर के अन्य सभी उत्पाद पतंजलि के माध्यम से भारत को देगा और भारत से जितने भी उत्पाद ईरान में आते हैं चाहे फल, खाद्यान्न, तेल इत्यादि भी लेगा। यह देश के लिए गौरव की बात है और पतंजलि के विश्वास की बात है।

ईरान में भारतीय संस्कृति का सम्मान
वही आचार्य बालकृष्ण ने फेस बुक वाल में आगे लिखा
तेहरान में ईरानी उपराष्ट्रपति देहघानी फिरौजाबाद साइंटिफिक टेक्नोलोजी द्वारा हरिद्वार से लाए हुए रुद्राक्ष माला को बड़ी ही आत्मीयता तथा भावपूर्ण ढंग से स्वीकार करना हमें यह अनुभव करवाता है कि भारतीय संस्कृति को विश्व में पहुंचाने की आवश्यकता है, स्वीकार्यता तो उसी से ही बढ़ेगी। माननीय उपराष्ट्रपति जी ने शिक्षा और संस्कृति के लिए विद्यार्थियों का आदान प्रदान, कृषि पर नवाचार अनुसंधान और परंपरागत जड़ी बूटी और इंटीग्रेटेड मेडिसिनल सिस्टम को शीघ्र प्रारंभ करने पर सहमति प्रदान करी और विभाग को शीघ्र एमओयू करने के लिए आदेशित किया। इस अवसर पर विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारीगण भी मौजूद थे।

आचार्य बालकृष्ण ने फेस बुक पेज पर आगे लिखा कि प्रिय भाई मौलाना कल्बे रूशेद रिज़वी जी का अतिशय अनुराग और प्रयासों के बलबूते पर यह यात्रा सफलता की ओर बढ़ रही है

ईरान सरकार के कृषि मंत्री डॉक्टर सैय्यद जावेद सदाती नेजाद और उनके मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों के साथ कृषि क्षेत्र में संभावनाओं पर पतंजलि के द्वारा सहयोग करने पर गहन विचार हुआ। उन्होंने भारत सरकार से भी गुजारिश की कि जितना हो सके वो दो तरफा कार्य करने में इच्छुक हैं और परस्पर रिश्तों को मजबूत करने की भावना रखते हैं। पतंजलि द्वारा किए जा रहे डिजिटलl कृषि के कार्य के लिए भी ईरान में अपनी सहमति जाहिर की। इससे हमें विश्वास है कि दो महान संस्कृति के समन्वय के साथ साथ कृषि के क्षेत्र में कार्य के साथ साथ परस्पर मैत्री को बढ़ाने वाला होगा।

अंत में आजादी टावर पर वंदेमातरम भारत माता की जय और ईरान की पवित्र की जय कहकर ईरान भारत की दोस्ती की नई इतिहास की रचना करना के लिए पतंजलि के रूहे रवा आचार्य बालकृष्ण ने मौलाना कल्बे रुशैद रिजवी के साथ किया ऐलान

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