जो किसी को भी सताए वो मुसलमान नहीं,हक़ यतीमों का जो खाए वो मुसलमान नहीं,आल इंडिया ”जश्ने क़ायम में बरसे अक़ीदत के फूल”, इमाम मेहदी अ. फ. के जन्म दिन पर 15 शाबान को हिंदुस्तान की सबसे बड़ी महफ़िल का बाराबंकी में अयोजन

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उठा दो पर्दये ग़ैबत किसी बहाने से,

ज़माना बदलेगा मौला तुम्हारे आने से

बाराबंकी । हज़रत इमाम मेहदी अ फ़- के जन्म दिन पर बाराबंकी में ग्राम सराय इस्माईल में हिंदुस्तान की सबसे बड़ी महफ़िल का आयोजन किया गया ।इस मौके पर खास मेहमान दुनिया के मशहूर डॉक्टर असद अब्बास साहब की मौजूदगी में फकरे हिंदुस्तान मौलाना अली रिज़वान ने कहा कलमा पढ़ने वालों का बाक़ी रहना इमाम की मौजूदगी की दलील है ।
इमामबाड़ा वजीह मोहम्मद सराये इस्माईल में सम्पन्न इस महफ़िल की मौलाना सैयद हबीब हैदर साहब की सदारत में की,डॉ० असद अब्बास ,कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी तनुज पुनिया ने मिलकर केक काटकर इमामे अस्र का जन्म दिन की खुशियां अवाम में बांटी,
कार्यक्रम का आरम्भ तिलावते कलामे पाक से सैयद मोहम्मद अब्बास साहब ने किया,

निज़ामत के फ़रायज़ जनाब ज़ीशान आज़मी साहब ने अपने बेहतरीन अन्दाज़ में अंजाम दिया ,
तमाम आलिमेदीन ज़ीनते महफ़िल बने रहे जिसमें मौलाना आज़िम बाक़री,मौलाना हिलाल अब्बास, मौलाना इब्ने अब्बास,असन्दरा प्रधान अक़ील जै़दी की मौजूदगी में मकामी व बैरूनी शायरो़ं ने नज़रानये अकीदत पेश किया

हिंदुस्तान के जाने माने शायरों मे शहज़ादा गुलरेज़ ने पढ़ा –

मेरी नज़र में तेरे इन्तेज़ार की तस्वीर,

भरी बहार मे जैसे बहार की तस्वीर ।

रज़ा सिरसवी ने महफिल में चार चांद लगा दिये लोगों की खूब वाह वाह लूटी उन्होन पढ़ा

जो किसी को भी सताए वो मुसलमान नहीं,

हक़ यतीमों का जो खाए वो मुसलमान नहीं ।

डॉ० रज़ा मौरान्वी ने अपने बेहतरीन अन्दाज़ में पढा-

कर्बला में जंग हिकमत बदल दी शाह ने,

ख़ंजरों के सामने सूखी ज़बां ले आये हैं ,

डॉ० नायब बलयावी ने पढ़ा –

बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ की है सदा,

ऐसी मुहिम की अव्वलीं दुख़्तर हैं फ़ातिमा

मीसम गोपाल पूरी ने भी बेहतरीन अंदाज़ में नज़रानये अकी़दत पेश किया ।

फख़री मेरठी ने पढ़ा

असग़र सा बहादुर कोइ हो ही नहीं सकता,

हद है कि गला छिद गया हंसना नहीं छोड़ा ।

वकार सुल्तानपुरी ने पढ़ा –

मिल लेती है मौला से तहरीर अरीज़े की,

है हमसे बहुत अच्छी तक़दीर अरीज़े की ।

डॉ० इफ़्हाम उतरौलवी ने पढ़ा –

उठा दो पर्दये ग़ैबत किसी बहाने से,

ज़माना बदलेगा मौला तुम्हारे आने से ।

चन्दन फ़ैज़ाबादी ने पढा –

वारिसे लहजए इन्कार तक आते आते,

बैयते थक गयीं बीमार तक आते आते।

रोशन बनारसी ने पढ़ा-

मोहम्मद के घराने में मोहम्मद जब सभी निकले,

कहां मुमकिन कि फिर कुरआन में कोई कमी निकले।

हसन मीरपुरी ने पढ़ा –

मौला तेरे आगे मेरे लब खुल नहीं सकते,

इसी वास्ते तहरीर किया मैंने अरीज़ा

सलीम बलरामपूरी ने पढ़ा –

मुहम्मद मुस्तुफ़ा ने जिन्हें महफ़िल से उठाया था कभी,

उन्हें आज मिम्बर पर बिठाया जा रहा है क्यूँ ।

अंजार सीतापुरी,अफरोज बलयावी,अफजाल रुदौलवी, असद जाफरी,मुसव्विर ज़ैदपुरी, अफ़रोज़ दतियावी, अफ़ज़ाल रूदौलवी, अजमल किंतूरी , कलीम आज़र बाराबंकवी, सरवरअली रिज़वी, अली गंगोलवी ,नायाब बलियावी, ने अपने बेहतरीन कलाम पेश किये ।
बड़ी खुलूस से आल इंडिया स्तर की इस महफ़िल को करने वाले हज़ारो लोगो के खाने का एहतेमाम करने वाले कार्यक्रम के संयोजक सै०तशबीह अब्बास व सै०अम्मार यासिर,सैयद मोहम्मद अली ताहा,सैयद मोहम्मद अली असगर (मोहम्मद ) ने बादे महफ़िल सभी का शुक्रिया अदा किया ।

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