इतिहास के पन्नो में यूपी ग़ाज़ीपुर के लाल मनोज सिन्हा का दर्ज हुआ नाम,गाज़ी अब्बास का अलम भारत के मुकुट पर लहराकर पाकिस्तान और आतंकियों के मुहँ पर किया धमाका,30 साल से मोहर्रम के बंद जुलूस जम्मू कश्मीर में शानो शौकत से निकले,आफताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद नक़वी,मौलाना सफ़दर हुसैन और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की कोशिशों से मिली कामयाबी से आंखों में आंसू के साथ शुक्र के सजदे से दुनिया की जन्नत में आया नया इंक़लाब

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तहलका टुडे टीम/आरिफ़ हुसैनी

दुनिया की जन्नत कश्मीर मे 30 साल बाद जुलूसाए अज़ा की बहाली के लिए इतिहास के पन्नो में यूपी ग़ाज़ीपुर के लाल मनोज सिन्हा का नाम अब नये अंदाज में दर्ज होकर इंक़लाब लाया है,आतंक के साये में डूबी इस सरज़मीं पर  गाज़ी अब्बास का परचम भारत के मुकुट पर लहरावकर आतंकियो को पालने वाले पाकिस्तान के मुहँ पर ऐसा धमाका किया है जो रहती दुनिया तक याद किया जाएगा।

आफताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ,पूर्वांचल के मोतबर आलिम मौलाना सफ़दर हुसैन साहब और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की कोशिशों से मिली इस कामयाबी से आंखों में आंसू के साथ शुक्र के सजदे से दुनिया की जन्नत में आया है नया इंक़लाब,तरक्की कामयाबी के साथ ये मोहर्रम में अज़ादारी की पाबंदी पर कॅरोना काल मे जुलूस निकलने से पूरी दुनिया मे चर्चा का विषय बन गया है।

कश्मीर के हालात और माहौल देख कर ये काम बेहद मुश्किल था मगर कश्मीर के शियों से मिलने के बाद ये एहसास हुआ की ये लोग दबा कर कुचल कर रखे जा रहे हैं इनको डराया जा रहा है आफताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद साहब कश्मीर के सूफी हज़रात से भी मिले अहले सुन्नत हज़रात से भी मिले और देखा की वो सब चाहते हैं कि शियों के साथ नाजायज ज़्यादती ना हो।

सबसे सकारात्मक सोच जो देखने को मिली वो LG जम्मू-कश्मीर मोहतरम मनोज सिन्हा साहब की थी जो उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर के होने की वजह से हर बात को समझ रहे थे और उन्होंने भी इस काम को अंजाम देने की ठान ली,डीजीपी दिलबाग़ सिंह ने जो रिस्पॉन्स दिया वो तो अभूतपूर्व था।

बरसों-बरस से बंद पड़े दरवाज़े खुलते जा रहे थे और रासते हमवार होते जा रहे थे। फिर वो दिन भी आया जब प्रशासन ने कश्मीर मे अंजुमनो से मीटिंग की अंजुमनो के सकारात्मक रवइये के बाद 6,7,8,9,10 और 11 मुहर्रम के जुलूस निकालने की अनुमानित दे दी गई जिसमे 8 और 10 मुहर्रम का जुलूस परंपरागत अतिसंवेदनशील मार्ग लाल चौक से गुज़रना था।

8 मुहर्रम को कुछ नौजवान लाहौरी मुल्ला के इशारे पर जुलूस को डिस्टर्ब करने की नियत से प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्ग से ना निकल कल डल गेट, चार चिनार और दूसरे रासतों से विवादित नारे लगते घुसने लगे। जिसको तितर बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने हलका बल प्रयोग किया।

हालाँकि इस घटना के बाद 9वीं और 10वीं के जुलूसों के ना निकाले जाने की पूरी संभावना बन गई थी मगर फिर एक बार LG मनोज सिन्हा और डीजीपी दिलबाग़ सिंह साहब का सकारात्मक रवइया काम आया, और रात तक फिर स्थिति ठीक हो गई और इस आशय से की नवीं मुहर्रम का जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से निकलेगा इजाज़त दे दी गई।
8 मुहर्रम को गिरफ्तार सभी लड़के रिहा कर दिए गए और कुछ पुलिस कर्मीयों की बदली कर दी गई। अब 9वीं मुहर्रम का जुलूस बिल्कुल शांतिपूर्ण निकला फिर 10वीं मुहर्रम का जुलूस 30 साल बाद बिना किसी झगड़े बवाल के निकला आप को याद होगा कि पिछले साल 30 अगस्त को श्रीनगर मे पैलट गन की फायरिंग मे बहुत से अज़ादार ज़ख़्मी हो गए थे और कुछ लोगों की जान भी चली गई थी।

इसी के बाद आफताबे मिल्लत मौलाना कल्बे जवाद साहब ने ये कोशिश शुरू की थी जो रंग लाई।

कश्मीर के अज़ादारी का मरकज़ बन कर उभरेने से आतंकियो में हड़कंप मच गया है,पूरी दुनिया में कश्मीर को पुरसुकून महौल पैदा करने वाले LG मनोज सिन्हा ,डीजीपी दिलबाग़ सिंह समेत भारतीय सुरक्षाबल, सीमा सुरक्षाबल, स्थानीय पुलिस प्रशासन, कश्मीर की अवाम अंजुमनाए मातमी के सदर वा सदस्य और ख़ासकर सभी ओलमा ख़ुतेबा और ज़ाकरीन चर्चा का विषय बने है।

पाकिस्तान अधीकृत कश्मीर का माहौल एक दम से बदला है अब वहा के लोग घुटन महसूस कर रहे है वही एल जी मनोज सिन्हा के घर घर चर्चे हो रहे है।

मालूम हो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास सिपहसालारों में मनोज सिन्हा का नाम है जो कश्मीर में एक नया इंक़लाब लाने मे और इतिहास के पन्नो में अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए है।

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने  वहा के हालात दुरुस्त करने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय का खजाना वहाँ की तरक्की के लिए उड़ेल दिया है,उनकी कोशिशो से हालात साज़गार हुए आतंक से घुट रही इंसानियत को आज़ाद भारत मे अब सुकून मिला है।

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