1500 हुई इंडोनेशिया भूकंप व सुनामी में मरने वालों की संख्या

विदेश

जकार्ता :  इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में शुक्रवार को आए भूकंप और इससे पैदा हुई सुनामी की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1500 हो गई है। आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, भूकंप में मरने वालों की संख्या दो हजार से ऊपर हो सकती है। ज्यादातर मौतें पालू शहर में दर्ज की गई हैं।

अधिकारियों ने बताया कि अब भी बहुत से लोग लापता हैं जिनमें से कई मलबे में दबे हो सकते हैं। सुलावेसी द्वीप का प्रमुख शहर पालू और भूकंप के केंद्र के पास स्थित डोंगाला शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए इंडोनेशिया की सेना को उतारा गया है। इंडोनेशिया के उपराष्ट्रपति यूसुफ काला का कहना है कि अभी भूकंप के केंद्र बिंदु के पास स्थित शहर डोंगाला से हुए नुकसान का पूरा ब्यौरा नहीं मिला है।

यहां मरने वालों की संख्या हजारों में हो सकती हैं। डोंगाला में करीब तीन लाख लोग रहते हैं। बचावकर्मी अब तक पालू शहर तक ही पहुंच पाए हैं। डोंगाला के कई दूरस्थ इलाकों तक पहुंचने में अभी भी कामयाबी नहीं मिली है।

 

अस्पतालों में लगी लोगों की भीड़

सरकार की आपात सेवा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पूर्वो नूगोरो का कहना है कि कई जगह सुनामी की लहरें 20 फीट तक ऊंची थीं और लोगों ने इससे अधिक ऊंचाई के पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई है। सुलावेसी द्वीप के मुख्य शहर पालू में हजारों लोग आपात केंद्रों में रह रहे हैं।

भूकंप और सुनामी के बाद बड़ी संख्या में अस्पताल आए घायलों के इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रभावित शहरों की सड़कों पर शव पड़े हैं और अस्पताल धराशाई होने की वजह से घायलों का इलाज टेंटों में किया जा रहा है। एक स्थानीय महिला ने बताया हर मिनट एंबुलेंस शव लेकर आ रही है।

 

सुलावेसू द्वीप पर अब भी भूकंप के झटके

सुलावेसी द्वीप में भूकंप और सुनामी के बाद खाने और पीने का पानी मिलना दुर्लभ हो गया है। छोटे बाजारों में हर तरफ लूट मची हुई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि भूकंप के बाद ज्यादातर लोग ऊंचे इलाकों में चले गए हैं।

सुलावेसू द्वीप पर भूकंप के झटके आने का सिलसिला अभी भी जारी है। इसकी वजह से लोगों में दहशत है। गौरतलब है कि शुक्रवार को आए 7.5 तीव्रता वाले भूकंप और करीब 20 फीट ऊंची सुनामी की लहरों ने भारी तबाही मचा दी थी।

 

वायु यातायात नियंत्रक की हो रही तारीफ

डोनेशिया के एक वायु यातायात नियंत्रक की मरणोपरांत हीरो के रूप में वाहवाही की जा रही है। यातायात नियंत्रक ने भयावह भूकंप के बावजूद अपनी जगह नहीं छोड़ी थी ताकि एक यात्री विमान को सुरक्षित उतारा जा सके।

21 वर्षीय एंथोनियस गुनावान आगुंग पालू के मुशियारा एसआईएस अल-जफरी हवाईअड्डे पर वायु यातायात नियंत्रण टावर में तैनात थे। शुक्रवार को वह अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे तभी सुलावेसी द्वीप के इस शहर में भूकंप के झटके महसूस किए गए।

 

मरते-मरते बचा गया कइयों का जीवन

अधिकारियों के मुताबिक, आगुंग ने बाटिक एयर के एक विमान के उतरने से पहले अपनी जगह छोड़ने से मना कर दिया। वहीं उनके कुछ सहकर्मी चले गए जिन पर विमान के नियंत्रण की जिम्मेदारी नहीं थी। इसी दौरान 7.5 तीव्रता का भूकंप का जोरदार झटका आया और साथ में सुनामी भी लाया।

आगुंग ने बचने की कोशिश में चार मंजिला टॉवर से छलांग लगा दी। उनकी टांग टूट गई और गंभीर भीतरी चोट आईं। उन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया जहां बाद में उनकी मौत हो गई।

 

किया जा रहा सामूहिक अंतिम संस्कार

इंडोनेशिया में भूकंप और इससे पैदा हुई सूनामी की वजह से मरनेवालों की संख्या 1500 के पार जा पहुंची है। प्रशासन ने इस प्राकृतिक आपदा के बाद बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए जल्द से जल्द शवों को दफनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दफनाने की प्रक्रिया सोमवार शाम से शुरू कर दी गई है।

इस बीच, कई लोग अब भी ध्वस्त इमारतों के बीच फंसे हुए हैं। भूकंप और सुनामी से मरने वालों की संख्या 1500 के पार हो चुकी है। आशंका है कि क्षतिग्रस्त सुलावेसी द्वीप में यह संख्या बढ़ सकती है।

देश में यह प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि अग्रिम सूनामी चेतावनी प्रणाली क्यों नहीं वर्षों से काम कर रही है। शुक्रवार को 7.5 तीव्रता का भूकंप आया था जिससे पैदा हुई सूनामी से समुद्र का पानी पालू में घुस आया था।

 

पेट भरने के लिए दुकानों में लूट

राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुग्रहो ने बताया, हताहतों की संख्या अभी बढ़ती रहेगी। हम मृतकों को एक साथ दफना रहे हैं, ताकि बीमारियों के फैलाव को रोका जा सके। भूकंप और सुनामी के बाद जीवित बचे लोग खाने-पीने की चीजों के लिए दुकान लूट रहे हैं।

लेकिन पुलिसकर्मी उन्हें नहीं रोक रहे। पालू में एक व्यक्ति ने बताया कोई सहायता नहीं है, हम भूखे हैं। हमारे पास दुकानें लूटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि हमें भोजन चाहिए।

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