लॉकडाउन में कैसे करे रमजान की इबादत : मुसलमानों के लिए जारी हुई इस्लामिक स्कालर मौलाना खालिद रशीद की एडवाइजरी, घर पर पढ़े नमाज़ और करे रोज़ा इफ्तार ,तरावीह पढ़ना है सुन्नत,मस्जिदों में सिर्फ 5 लोग करे अदा,अफ्तारी भेजने के बजाय उस रकम को गरीबो में दे बांट या दे राशन

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तहलका टुडे टीम

कोरोना के संक्रमण के साये में मुसलमानों का पवित्र रमजान का मुबारक महीना फंसता नजर आ रहा है. रमजान का महीना 24 या 25 अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है. मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने मुसलमानों से कहा कि रमजान के दौरान भी लॉकडाउन का पालन करें और इस महामारी से बचाने के लिए अल्लाह से खास दुआ करें. मस्जिद में पांच लोग तरावीह पढ़ें और बाकी लोग अपने-अपने घरों से पढ़े

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कोरोना वायरस के साये में पवित्र रमजान का महीनाघर में रहकर ऐसे करें रोजा-नमाज और पढ़ें कुरान
कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार देश में बढ़ता ही जा रहा है. कोरोना के संक्रमण के साये में मुसलमानों का पवित्र रमजान का मुबारक महीना फंसता नजर आ रहा है. रमजान का महीना 24 या 25 अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है. ऐसे में ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने मुसलमानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान भी लॉकडाउन का पालन करें और इस महामारी से बचाने के लिए अल्लाह से खास दुआ करें.

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और लखनऊ के शहर काजी मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा, इबादतों से भरपूर रमजान का महीना ऐसे वक्त पड़ रहा है जब देश और पूरी दुनिया कोरोना वायरस जैसी महामारी से जूझ रही है. जिंदगी में ऐसा पहली बार हो रहा है कि लॉकडाउन के बीच मुस्लिम समुदाय रमजान मनाएगा. मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों में आजादी से नहीं जा सकेंगे. उन्हें अपने घरों में इबादत करनी होगी.

मौलाना ने कहा कि मुसलमान पूरे महीने रोजे रखें और रमजान में खासकर इफ्तार के वक्त कोरोना से मुक्ति के लिए खास दुआ करें. जो लोग हर साल मस्जिद में गरीबों के लिए इफ्तारी का आयोजन करते थे, वे इसे इस साल भी करें, लेकिन उस खाने को मस्जिद भेजने के बजाय जरूरतमंदों कुछ रकम या फिर उसके राशन को गरीबों में बांट दें. साथ ही कहा कि रोजेदार इस बात को सुनिश्चित करें कि रमजान के मुबारक महीने में कोई भी इंसान भूखा ना रहे.

लॉकडाउन में ऐसे पढ़ें तरावीह की नामाज़

खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि जिन लोगों पर जकात फर्ज है वे गरीबों में जकात जरूर बांटें. रमजान में लोग तरावीह भी जरूर पढ़ें, लेकिन मस्जिद में एक वक्त में पांच से ज्यादा लोग जमा ना हों. मुहल्ले के बाकी लोग मस्जिदों में आने के बजाय अपने अपने घरों में ही रहकर तरावीह की नमाज बकायदा अदा करें. साथ ही कहा कि जिन घरों में हाफिज हों तो वह पूरी कुरान मजीद पढ़ें, वरना जिसको जितना भी याद हो, वह 20 रकाज में उसे पढ़ें. उन्होंने लोगों को एक जगह पर इकट्ठा होने से भी मना किया है और सोशल डिस्टेंस का पूरी तरह से पालन करने की अपील की है.

मस्जिद में पांच लोगों से ज्यादा न रहें

उन्होंने कहा कि मस्जिद में एक वक्त में 5 से ज्यादा लोग न जुटें. फिलहाल जो लोग मस्जिद में ही रह रहे हैं, इफ्तारी मस्जिद सिर्फ उन्हीं को भेजी जाए. साथ ही कहा कि रमजान के महीन में जो लोग हर साल मस्जिद में इफ्तारी भेजते थे, वह इस साल भी करें, लेकिन मस्जिद के बजाय जरूरतमंदों के घर भी पहुंचाएं. रमजान में इफ्तार पार्टियां करने वाले इसकी रकम से गरीबों को राशन बांटें.

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उन्होंने कहा कि सरकार ने लॉकडाउन की समय सीमा 14 अप्रैल तय की थी लेकिन ऐसा अनुमान है कि इस महामारी पर काबू पाने के लिए इसकी मियाद और बढ़ाई जाएगी. ऐसे उम्मीद है कि आगामी 24 अप्रैल को रमजान उल मुबारक का चांद दिखाई पड़ेगा और 25 अप्रैल को पहला रोजा होगा. सभी मुसलमानों से गुजारिश है कि वे रमजान में भी लॉकडाउन का पालन करें और सामाजिक दूरी बनाए रखें.

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