बुढे को जवान बनाने वाली दालों की महारानी उरद का बूढ़ी हो चुकी वसुंधरा की राजस्थान सरकार मे 56 कि जगह 5 रुपये मे खरीद कर किसानो को किया जा रहा हैं बर्बाद,मोदी कि नीतियो पर कमीशन खोर अधिकारी लगा रहे पलीता,विपक्ष को दे दिया नया हथियार,उरद के टोटके और फायदे और नुक़्सान भी पढिये इस खास रिपोर्ट मे

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तहलका टुडे टीम /रिज़वान मुस्तफा

जयपुर/कोटा -बुढे को जवान बनाने वाली दालों की महारानी उरद का बूढ़ी हो चुकी वसुंधरा की सरकार मे 56 कि जगह 5 रुपये मे खरीद कर किसानो को बर्बाद कर,मोदी कि नीतियो पर कमीशन खोर अधिकारी पलीता लगाकर विपक्ष को दे रहे हैं नया हथियार,वसुंधरा ने पुरे मामले को गम्भीरता से नही लिया हैं।ऐसे ही फार्मल्टी कर जांच के आदेश दिया है। वही मौके का फायदा उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत ने हाड़ौती के किसानों की दुर्दशा के लिए भाजपा की कथनी और करनी में अंतर को जिम्मेदार बताया है.


मालूम हो उरद या उड़द एक दलहन होता है। उरद को संस्कृत में ‘माष’ या ‘बलाढ्य’; बँगला’ में माष या कलाई; गुजराती में अड़द; मराठी में उड़ीद; पंजाबी में माँह, अंग्रेज़ी, स्पेनिश और इटालियन में विगना मुंगों; जर्मन में उर्डबोहने; फ्रेंच में हरीकोट उर्ड; पोलिश में फासोला मुंगों; पुर्तगाली में फेजों-द-इण्डिया तथा लैटिन में ‘फ़ेसिओलस रेडिएटस’, कहते हैं।

इस दालो की महारानी को राजस्थान के कोटा जिले के कांजीहेड़ा गांव के गोपाल मीणा ने तीन महीने पहले बड़ी उम्मीद से अपनी 10 बीघा जमीन में उड़द बोये थे. बेमौसम बारिश से फसल खराब होने के बावजूद उसे भरोसा था कि लागत तो निकल ही जाएगी, लेकिन कोटा की भामाशाह मंडी में गोपाल की उपज की बोली लगी तो उसके होश उड़ गए.

गोपाल के 7 क्विंटल उरद महज 3,500 रुपये में बिके. वे कहते हैं, ‘खेतों की जुताई, बीज, दवाई, निराई-गुड़ाई, फसल काटने और निकालने में मेरे 30,000 रुपये खर्च हो गए. पकी फसल पर पानी गिरने से यह खराब हो गई. फिर भी लागत निकलने की उम्मीद थी पर मंडी में 500 रुपये की रेट लगी. हमसे पहले राम रूठा और अब राज रूठ गया.’

वे आगे कहते हैं, ‘उरद का सरकारी रेट 5,600 है. मैं पंद्रह दिन से सरकारी कांटा शुरू होने की बाट जोह रहा था. मुझे पैसों की जरूरत थी. सेठ को पैसे लौटाने थे और आगे की फसल बोने के लिए खेतों को तैयार करना था. इसलिए मजबूरी में माल मंडी में बेचना पड़ा. यदि सरकारी कांटा शुरू हो जाता तो भी मेरी लागत निकल जाती.’

खेती के लिहाज से सरसब्ज माने जाने वाले राजस्थान के हाड़ौती संभाग (कोटा, बूंदी, बारां व झालावाड़ जिला) में उरद की उपज को औने-पौने दाम पर बेचने वाले गोपाल अकेले किसान नहीं हैं, क्षेत्र के हजारों किसानों की यही कहानी है. हाड़ौती की मंडियों में 500 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से उरद खरीदा जा रहा है.

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार हाड़ौती में इस बार 42,730 हैक्टेयर उड़द की बुवाई हुई. किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन बेमौसम बारिश ने खेल खराब कर दिया. कई इलाकों में तो पूरी फसल चौपट हो गई. कुदरत के इस कहर को तो किसानों ने अपनी किस्मत समझ सह लिया, लेकिन सरकार की सुस्ती उन्हें शूल की तरह चुभ रही है.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर इस बार उरद का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,600 रुपये प्रति क्विंटल जबकि लागत मूल्य 3,438 रुपये क्विंटल तय किया है, लेकिन हाड़ौती में सरकारी केंद्रों पर खरीद शुरू नहीं होने की वजह से किसानों को औने-पौने दामों पर अपनी उपज बैचनी पड़ रही है.

मंडियों में उरद की खरीद करने वाले व्यापारियों की मानें तो गुणवत्ता अच्छी नहीं होने की वजह से किसानों को ज्यादा कीमत नहीं दे पा रहे. बूंदी की कुवारती कृषि उपज मंडी के व्यापारी गोपाल कुमावत कहते हैं, ‘पकी फसल पर बारिश होने की वजह से उरद में फंफूद लग गई है. इस वजह से भाव कम है. अच्छी किस्म का उरद आए तो ज्यादा भाव दें.’

कम दाम मिलने के बाद भी हाड़ौती की मंडियों में उरद की खूब बिकवाली हो रही है. क्षेत्र की बड़ी मंडियों में पिछले हफ्ते रोजाना लगभग 20,000 क्विंटल उरद बिकने के लिए आया. व्यापारियों के मुताबिक इस हफ्ते इसकी मात्रा बढ़कर 30,000 क्विंटल हो जाएगी.

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि किसानों की इतनी खस्ता हालत होने के बावजूद वसुंधरा सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उरद की खरीद क्यों नहीं कर रही. चुनावी मौसम में किसानों की त्योरियां चढ़ाने वाला काम क्यों कर रही है? इसके जवाब में सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक इतना ही कहते हैं कि जल्द ही उरद की खरीद के सरकारी केंद्र खोले जाएंगे.

गौरतलब है कि राजस्थान में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद सहकारी समितियों के मार्फत होती है. अमूमन सितंबर के तीसरे हफ्ते में खरीद के सरकारी केंद्र खुल जाते हैं, लेकिन इस बार अब तक कोई सुगबुगाहट नहीं है. सूत्रों के अनुसार बारिश से फसलों के खराब हो जाने की वजह से सरकार जानबूझकर सहकारी समितियों को खरीद शुरू करने की अनुमति नहीं दे रही.

क्षेत्र के किसान नेता सरकार की इस मंशा की पुष्टि करते हैं. हाड़ौती किसान यूनियन के महामंत्री दशरथ कुमार कहते हैं, ‘सरकार यह जानती है कि बारिश की वजह से खराब हुई फसल को किसान ज्यादा दिन तक अपने पास नहीं रखेंगे. वे इसे तुरंत मंडी में बेचेंगे. वैसे भी किसानों को रबी की फसल की तैयारी के लिए तुरंत पैसा चाहिए इसलिए वे जो भी दाम मिलेगा उस पर अपनी फसल को बेचेंगे.’

वे आगे कहते हैं, ‘व्यापारी सरकार की शह पर किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं. वे औने-पौने दाम पर अपनी फसल बेच रहे हैं. जब तब सरकारी कांटा शुरू होगा तब तक ज्यादातर किसान अपनी फसल बेच चुके होंगे. जो अपनी फसल रोक भी लेंगे उनकी फसल बिकने की कोई गारंटी नहीं है. अफसर उनकी फसल को रिजेक्ट कर देंगे. लहसुन की खरीद के समय ऐसा हो चुका है.’

गौरतलब है कि हाड़ौती में इस साल लहसुन की बंपर पैदावार हुई थी. वसुंधरा सरकार ने इसे बाजार हस्तक्षेप योजना के अंतर्गत 3257 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने के लिए सरकारी खरीद केंद्र तो खोले, लेकिन बेतुकी शर्तों की वजह से क्षेत्र के 20 प्रतिशत किसान भी अपनी फसल यहां नहीं बेच पाए. इससे दुखी होकर पांच किसानों ने आत्महत्या कर ली जबकि दो की सदमे से मौत हो गई.

लहसुन के सरकारी खरीद केंद्रों का हश्र देख चुके किसानों को आशंका है कि यही हालत उरद के साथ भी होगी. बूंदी जिले के सुंदरपुरा गांव के किसान महेंद्र कहते हैं, ‘मैंने उरद नहीं बेचा है. मैं सरकारी कांटा शुरू होने का इंतजार कर रहा हूं. पर मेरा नंबर आना मुश्किल है. मेरे मोबाइल पर लहसुन का मैसेज आया था पर मेरा नंबर आने से पहले ही कांटा बंद हो गया.’

महेंद्र आगे कहते हैं, ‘मैं सरकारी कांटा खुलने के बाद पांच-सात दिन देखूंगा. यदि लहसुन के कांटों जैसा ही हाल रहा तो मेरे पास अपना माल मंडी में बेचने के अलावा और कोई चारा नहीं बचेगा. सरकार हमारी तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है. चुनाव के समय तो हमारी सुध लेनी चाहिए.’

हाड़ौती के किसानों को सरकार की बेरुखी इसलिए भी ज्यादा अखर रही है, क्योंकि यह संभाग मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी का गृह क्षेत्र है. राजे झालावाड़ जिले के झालरापाटन से विधायक हैं जबकि सैनी बारां जिले के अंता से जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे हैं.

कोटा जिले के आवां गांव के किसान रमेश काछी इससे बहुत खिन्न हैं. वे कहते हैं, ‘मुख्यमंत्री हमारे संभाग की हैं, लेकिन उन्हें हम पर तरस नहीं आ रहा. मैंने अखबार में पढ़ा था कि मोदी जी ने फसल की सरकारी रेट डेढ़ गुना बढ़ा दी है मगर हमारा उरद तो लागत की रेट पर भी नहीं बिका. हम किसके हाथ जोड़े? पहले ही कर्जा हो रहा है अब और कर्जा लेना पड़ेगा.’

किसानों में खरीफ की फसलों की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने का गुस्सा तो है ही, अतिवृष्टि की वजह से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलने की नाराजगी भी है. इलाके में इस बार हुई बेमौसम बारिश से किसानों की फसल तबाह हो गई. कई जगह तो अभी भी खेतों में पानी भरा हुआ है. इससे पकी हुई फसल अंकुरित हो गई है.

चुनाव के चलते स्थानीय नेता किसानों को मुआवजे के लिए लगातार आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी को फूटी कौड़ी नहीं मिली है. बूंदी जिले के गुड़ादेवजी गांव के शोजी लाल नागर इस दवाब को नहीं झेल पाए. बीते 23 सितंबर को उनकी सदमे से मौत हो गई.

शोजी के बेटे कहते हैं, ‘हमने इस बार 50 बीघा जमीन बटाई पर ली थी. पूरी जमीन में उरद बोया. फसल अच्छी थी, लेकिन कटाई से पहले हुई बारिश ने एक दाना भी नहीं छोड़ा. पिता जी इसका सदमा नहीं झेल पाए. उन्होंने खेत में ही दम तोड़ दिया. पहले से कर्जा माथे पर है. अब और लेना पड़ेगा.’

इसी गांव के मनोज योगी कहते हैं, ‘हमारे गांव के ज्यादातर किसान भारी मानसिक दवाब में हैं. शोजी लाल अपनी आंखों के सामने पकी हुई फसल तबाह होते देख नहीं पाए. सदमे से मर गए. जिनकी थोड़ी-बहुत फसल बची भी है तो सही रेट नहीं मिल रहा. इस स्थिति में किसान मरे नहीं तो क्या करे.’

उरद की फसल के अलावा हाड़ौती के किसानों को सोयाबीन का भी यही हश्र होने का डर सता रहा है. सोयाबीन की कटाई का समय आ गया है, लेकिन खेतों में पानी भरा होने की वजह से किसान इसे काट नहीं पा रहे. किसान संगठनों के मुताबिक बारिश से इस बार सोयाबीन का आधे से कम उत्पादन होगा.

पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत ने हाड़ौती के किसानों की दुर्दशा के लिए भाजपा की कथनी और करनी में अंतर को जिम्मेदार बताया है. वे कहते हैं, ‘मोदी जी ने चुनाव से पहले किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था जो जुमला साबित हुआ है. जुमलेबाज सरकार एक ओर एमएसपी बढ़ाने का ढोल पीट रही है और दूसरी ओर किसानों की उपज नहीं खरीद रही.’

गहलोत आगे कहते हैं, ‘इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि जिस हाड़ौती संभाग से मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री चुनकर आए हैं, वहां उड़द और बाकी खरीफ की फसलों की एमएसपी पर खरीद नहीं हो रही. इस सरकार की नीतियों की वजह से हाड़ौती जैसे कृषि संपन्न क्षेत्र के किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.’

उरद के हिदुस्तानियो के  टोटके

 

नए उद्योग हेतु-यदि आपका पुराना व्यवसाय चल रहा है और आप एक नया व्यवसाय आरम्भ करने जा रहें है तो शनिवार को पुराने कार्यालय से कोई भी लोहे की वस्तु लाकर नई दुकान में रखें व रखने से पूर्व उस स्थान पर थोड़े साबुत काले उरद डाल दें। ये उपाय करने से नया व्यवसाय भी अच्छा चलने लगता है।

विवाह में बिलम्ब

अगर किसी जातक के विवाह में बाधाओं के कारण विवाह में बिलम्ब हो रहा है तो 250 ग्रा0 काले तिल, 250 ग्रा0 काले उरद, 250 ग्रा0 तिल का तेल, सवा मीटर काला कपड़ा, एक नारियल शनिवार को रखकर पूजा करें। ये उपाय लगातार 8 शनिवार करने से शीघ्र विवाह हो जाता है।कार्य सिद्धि के लिए-नया कार्य आरम्भ करने से पूर्व प्रस्थान करते समय घर की कोई महिला एक मुठठी काले उड़द उस व्यक्ति के उपर से उतार कर पृथ्वी पर छोड़ दें तो कार्य में सिद्धि मिलती है।

धन लाभ हेतु

शनिवार को सांयकाल 2 उरद के दाने लेकर उस पर दही व सिंदूर छिड़के, उसे पीपल के पेड़ के नीचे रख आये। ऐसा लगातार 21 दिन तक करने से आर्थिक स्थिति ठीक हो जाती है।दुव्र्यसन में पड़े बच्चों के लिए-यदि आपका बच्चा आपकी बात नहीं मानता या फिर किसी गलत संगत में पड़ गया है तो उरद की दाल के कच्चे पापड़ पर साबुत काले उरद, गुड़, सरसों के तेल का दीपक, दो लोहे की कीलें, लोटे में थोड़े काले तिल डालकर जल, सिंदूर व लाल गुलाल से सजाकर शनिवार के दिन शाम सारी सामग्री को पीपल के पेड़ के नीचे रख दें व लुटिया का जल पीपल की 7 बार परिक्रमा करके पीपल पर चढ़ा दें। ऐसा लगातार 8 शनिवार करने से बच्चा ठीक हो जाता है।

शारीरिक कमजोरी, शीघ्रपतन या नपुसंकता

व्यापार में चल रहे घाटे के लिए-भरपूर मेहनत करने के बावजूद भी अगर व्यवसाय में कोई प्रगति नहीं हो रही है तो रविवार को एक मुठठी काले उड़द लेकर ‘श्री’मन्त्र का जाप करते हुये व्यवसाय स्थल पर 7 बार उतार कर दुकान में बिखेर दें। अगले दिन मोरपंख की झाड़ू से एकत्र करके चैराहे पर डालें। ऐसा 7 रविवार करने से ग्राहको की भीड़ बढ़ जाती है और व्यापार में वृद्धि होने लगती है।शारीरिक कमजोरी, शीघ्रपतन या नपुसंकता-नाश्ते में उड़द की खीर खाकर दूध का सेेंवन करें तथा उड़द की दाल खायें। इससे शारीरिक कमजोरी, शीघ्रपतन या नपुसंकता दूर हो जाती है।

वर-वधु में प्यार बढ़ाना

साबुत काले उरद में मेंहदीं मिलाकर जिस दिशा में वर-वधु का घर हो उस तरफ फेंक देने से क्लेश समाप्त होकर आपस में प्यार बढ़ता। यह उपाय जॅहा से विवाह हुआ वॅही से करना है।बेरोजगारी दूर करने हेतु-300 ग्रा0 काले उड़द का आटा लेकर बिना छाने एक रोटी धीमी आॅच पर सेंक लें। इसके चैथाई भाग को तोड़कर काले रंग के कपड़े में बांध लें तथा शेष पौने रोटी की 101 छोटी गोलियाॅ बनाकर एक-एक करके मछलियों को खिला दें। कपड़े में बॅधे रोटी को मछलियों को दिखाते हुए एक साथ पानी में बहा दें। ये उपाय नियमित 43 दिन तक करने से रोजगार अवश्य मिलता है।

आइए उड़द की दाल से होने वाले कुछ प्रमुख फायदे और नुकसान पर एक नजर डालते हैं.

1.शुगर के उपचार में
शुगर से पीड़ित व्यक्ति उड़द की दाल में पाए जाने वाले फाइबर की सहायता से लाभान्वित हो सकता है. फाइबर हाथ में पोषक तत्वों की तीव्रता को विनियमित करने में फायदेमंद होता है. यह हमारे रक्त में इंसुलिन और गोलू के ग्लूकोज का स्तर भी नियमित करने में उपयोगी होता है. शुगर के मरीजों के लिए इंसुलिन और ग्लूकोज का स्तर संतुलित रखना काफी राहत देने वाला होता है.
2. बदन दर्द से राहत में
उड़द की दाल के प्रयोग से आप शरीर के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं. उड़द की दाल में पाए जाने वाले खनिज और विटामिन हमारे उपापचय की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं. इसके साथ ही ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके हमारे शरीर से दर्द और सूजन को मिटाने में सहायक होते हैं. इस तरह शरीर के दर्द को भगाने के लिए उड़द की दाल का नियमित सेवन लाभदायक होता है.
3. पाचन की समस्या दूर करने में
उड़द की दाल में पाया जाने वाला फाइबर हमारे जठर तंत्र के किसी भी समस्या से निपट सकता है. दरअसल फाइबर, मल को त्यागने और पेस्टलेटिक गति को प्रोत्साहित करने का काम करता है. उड़द की दाल पेट फूलने, कब्ज, पेट में ऐंठन आदि पेट की समस्याओं को दूर करती है. इसके साथ ही भोजन के पोषक तत्वों को अवशोषित करके भोजन का सम्पूर्ण लाभ प्रदान करती है.
4. हड्डियों को मजबूत करने में
उड़द की दाल में फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आदि खनिजों की मौजूदगी हड्डियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होती है. इन तत्वों से हड्डियों में होने वाली टूटन कम होती है. इसके साथ ही हड्डियों का घनत्व भी बरकरार रहता है. कमजोर हड्डियों में मजबूती आ जाने से ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी समस्याएं भी समाप्त होती हैं. हड्डियों में लचीलापन लाने के साथ ही ये हड्डियों की अन्य समस्याओं की संभावना को भी खत्म करती है.
5. ऊर्जा को बढ़ाने में
उड़द की दाल हमारे शरीर की ऊर्जा स्तर में वृद्धि करती है. इसके साथ-साथ ये जीवन शक्ति की वृद्धि करने का भी एक बेहतर विकल्प साबित होती है. उड़द की दाल में पाया जाने वाला आयरन हमारे शरीर की रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह रक्त कोशिकाएं, हमारे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रखने में काफी मददगार होती है. ऑक्सीजन का हमारे शरीर में संचरण होने से उर्जा के स्तर में वृद्धि होती है. इससे आयरन की कमी से होने वाले रोगों की संभावना काफी हद तक कम होती है.
6. त्वचा के लिए
उड़द की दाल का प्रयोग हमारे त्वचा को भी स्वस्थ रखने में लाभदायक साबित होता है. उड़द की दाल में मौजूद खनिज और विटामिन हमें सूजन जैसी समस्याओं से निजात दिलाते हैं. इसके अलावा यह ब्यूटी मार्क्स से और त्वचा से संबंधित अन्य समस्याओं से भी छुटकारा दिलाते हैं. त्वचा पर ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को बढ़ाने में भी उड़द की दाल की भूमिका काफी सकारात्मक होती है. सन बर्न और मुंहासों जैसे लक्षणों को भी उड़द की दाल से नियंत्रित किया जा सकता है.
7. दिल के लिए
उड़द की दाल हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में भी फायदेमंद होती है. दरअसल इस में पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर आदि जैसे खनिज पदार्थ पाए जाते हैं. जो कि ह्रदय को स्वस्थ रखने में काफी मददगार होते हैं. इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित किया जाता है.

उड़द की दाल के नुकसान

  • उड़द की दाल के सेवन से किसी व्यक्ति के शरीर में यूरिक एसिड की वृद्धि हो सकती है.
  • गुर्दे की पथरी और पित्त की पथरी से पीड़ित मरीज इसका सेवन ना करें.

 

 

 

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